समुदिरक शास्त्र | Samudrik Shastra

By: भृगुराज - Bhraguraj
समुदिरक शास्त्र | Samudrik Shastra by


दो शब्द :

इस पाठ में ज्योतिष और उससे संबंधित विद्या की महत्ता, इतिहास और वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई है। भारत को ज्योतिष के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी माना गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसे पिछड़ा देश माना जाता है। इसके अवनति के दो मुख्य कारण बताये गए हैं: पहला, शिक्षा का अभाव, जहाँ कोई विद्यालय नहीं है जो इसे सिखाता हो; और दूसरा, जनता की उपेक्षा, जो ज्योतिष को केवल जन्मपत्री बनाने या तंत्र-मंत्र की विधा समझती है। लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय विद्या का विकास प्राचीन काल से हुआ है और भारतीय ज्योतिष विद्या का प्रभाव अन्य देशों में भी पड़ा है। विभिन्न ग्रहों और मानव जीवन के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया गया है। रेखा विज्ञान पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि मानव जीवन में रेखाओं का क्या महत्व है और कैसे ये जीवन के परिवर्तनों से प्रभावित होती हैं। लेख में यह भी बताया गया है कि ज्योतिष विद्या का अस्तित्व प्राचीन काल से है और इसकी नींव वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। विभिन्न देशों में इसका प्रसार और स्वीकार्यता भी दर्शाई गई है, जिसमें यूरोप के देशों में ज्योतिष का इतिहास और जिप्सी लोगों का योगदान शामिल है। अंत में यह कहा गया है कि ज्योतिष विद्या को समय के साथ-साथ प्रयोजनों में बदलाव के बावजूद, आज भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।


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