काय - चिकित्सा भाग -1ii | Kay -Chikitsa Vol-1ii

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: ब्रह्मानंद त्रिपाठी - Brahmanand Tripathi
- पृष्ठ : 356
- साइज: 15 MB
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दो शब्द :
यह पाठ "प्रकाशक" के विवरण से शुरू होता है, जिसमें चोखम्बा सुरभारती प्रकाशन का पता, संपर्क जानकारी, और प्रकाशन वर्ष दिया गया है। इसके बाद, ग्रंथ का शीर्षक "घरकसंदिता" और उसके व्याख्याकारों का उल्लेख है। यह ग्रंथ आयुर्वेदिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण स्रोत है और इसे चिकित्सा के क्षेत्र में अत्यंत मान्य माना जाता है। लेख में बताया गया है कि चरक संहिता का अध्ययन भारतीय चिकित्सा विज्ञान का आधार है, और इसके अंत में लेखक ने यह प्रतिज्ञा की है कि इसमें जो ज्ञान प्रस्तुत किया गया है, वही चिकित्सा के क्षेत्र में सर्वथा मान्य है। चरक की एक विशेषता यह है कि उन्होंने अपने विषय में विस्तार से चर्चा की है और अन्य विषयों के आचार्यों के विचारों को नहीं जोड़ा। इसके बाद, ग्रंथ के लेखक ने यह बताया है कि चिकित्सा के क्षेत्र में नए और पुराने ज्ञान का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने स्वास्थ्य, जीवन के विकास और आनंद की साधना को महत्वपूर्ण बताया है। यह भी कहा गया है कि व्यक्ति और राष्ट्र की उन्नति का आधार उनके स्वास्थ्य में निहित है। पाठ में विभिन्न अध्यायों का उल्लेख किया गया है, जिसमें वातव्याधि, आनुवंशिक रोग, मनोविज्ञान, और अन्य चिकित्सा से संबंधित विषयों का विस्तृत वर्णन है। यह ग्रंथ आयुर्वेद के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है, जो पाठकों को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेद के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करता है। अंत में, लेखक ने अपने परिवार, पूर्वजों और प्रकाशक को धन्यवाद देते हुए यह आशा व्यक्त की है कि यह ग्रंथ पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
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