अथर्ववेद (शौनकीय ) | Atharva Veda (shaunkiy)

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता
- लेखक: श्री सायणाचार्य - Shri Sayanacharya
- पृष्ठ : 464
- साइज: 48 MB
- वर्ष: 1962
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दो शब्द :
इस पाठ में वेदों के विभिन्न सूक्तों और उनके महत्व पर चर्चा की गई है। विशेष रूप से, यह उन मंत्रों और यज्ञों की व्याख्या करता है जो विभिन्न देवताओं की आराधना के लिए उपयोग किए जाते हैं। पाठ में यह बताया गया है कि कैसे सूक्तों का सही उपयोग करके मनुष्य अपने जीवन में शांति, समृद्धि और शुभता प्राप्त कर सकता है। पाठ में श्रीगणाधिपतये नमः के साथ शुरू होकर, विभिन्न यज्ञों और उनकी विधियों का वर्णन किया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि यज्ञों में आहुतियों का विशेष महत्व होता है और इनसे प्राप्त होने वाले फल के लिए सही तरीके से मंत्रों का उच्चारण आवश्यक है। इसके अलावा, यह भी बताया गया है कि यज्ञों के माध्यम से जल, वायु और अन्य प्राकृतिक तत्वों की आराधना की जाती है, जिससे समग्र पर्यावरण को संतुलित रखा जा सके। पाठ में विद्वानों द्वारा दी गई शिक्षाएँ और निर्देश भी शामिल हैं, जो यज्ञों की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। इस प्रकार, पाठ वेदों की गहनता को समझाने के साथ-साथ, धार्मिक परंपराओं और यज्ञों के महत्व को भी उजागर करता है।
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