रामायण (१९४८) | Ramayana(1948)

By: गोस्वामी तुलसीदास - Goswami Tulsidas
रामायण (१९४८) | Ramayana(1948) by


दो शब्द :

यह पाठ "रामायण" की विशेषताओं और इसके महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करता है। इसमें बताया गया है कि श्रीगोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामायण कराल कलिकाल के प्रभावों से ग्रसित लोगों के लिए एक परम आधार है। इस पुस्तक को कई बार प्रकाशित किया गया है और इसे विद्या तथा रामभक्ति के प्रति अनुराग रखने वाले व्यक्तियों ने बड़े सम्मान से स्वीकार किया है। लेखक ने इस बार विशेष रूप से एक नई युक्ति के साथ रामायण को प्रस्तुत किया है, जिसमें प्रत्येक काण्ड के आरंभ में उस काण्ड की संक्षिप्त कथा का चित्रण किया गया है। इसके साथ ही, कठिन शब्दों के अर्थ भी नीचे दिए गए हैं ताकि पाठक को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसमें तुलसीदास जी का जीवनचरित्र, संकटमोचन, रामबाराखड़ी, बजरंगबाण और रामायण का महात्म्य जैसी सामग्री भी शामिल है। पुस्तक में विभिन्न काण्डों का सारांश प्रस्तुत किया गया है, जैसे बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, और उत्तरकाण्ड। प्रत्येक काण्ड में प्रमुख घटनाओं का वर्णन किया गया है, जैसे श्रीराम का जन्म, सीता हरण, और रावण से युद्ध। इस प्रकार, यह पाठ रामायण की महत्ता और इसकी रचना की विशेषताओं को उजागर करता है, जिससे पाठक को रामायण की गहराई और इसकी धार्मिक तथा सांस्कृतिक मूल्य का अनुभव होता है।


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