सामुद्रिक शास्त्र या भाग्य निर्णय | Samudrik Shastra or Bhagya Nirnay

- श्रेणी: धार्मिक / Religious
- लेखक: छोटेलाल जैन - Chhotelal Jain
- पृष्ठ : 76
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1927
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दो शब्द :
इस पाठ में भूसिका (सामुद्रिक शास्त्र) के अध्ययन और उसके महत्व पर चर्चा की गई है। इसमें बताया गया है कि मानव जीवन की घटनाओं और उसके भविष्य को समझने के लिए हाथों में दिखाई देने वाले चिन्हों और रेखाओं की व्याख्या की जा सकती है। लेखक ने यह बताया है कि विभिन्न चिन्ह जैसे शंख, चक्र, और अन्य आकृतियाँ व्यक्ति के जीवन में भाग्य, धन, और विभिन्न गुणों को दर्शाती हैं। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, विभिन्न ग्रहों और उनके प्रभावों का अध्ययन करके यह पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति का जीवन कैसा होगा। उदाहरण के लिए, शुक्र ग्रह प्रेम और विवाह का प्रतीक है, जबकि शनि दुःख और कठिनाइयों का। इसके अलावा, पाठ में यह भी बताया गया है कि हाथ में मौजूद विशेष चिन्ह व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे धन, विद्या, और सामाजिक स्थिति को कैसे प्रभावित करते हैं। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि सामुद्रिक शास्त्र का अध्ययन न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि समाज को जागरूक करने में भी सहायक हो सकता है। यह पाठ जैन शास्त्रों और पाश्चात्य ज्योतिषियों के दृष्टिकोण को भी समाहित करता है, जो हाथों के अध्ययन के माध्यम से जीवन की घटनाओं की भविष्यवाणी करने में विश्वास रखते हैं। अंत में, पाठ के लेखक ने सामुद्रिक शास्त्र के विभिन्न पहलुओं को संक्षेप में प्रस्तुत किया है ताकि पाठक इस विषय में रुचि लें और अपने अनुभवों के आधार पर और अधिक ज्ञान अर्जित करें।
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