प्राचीन भारत का इतिहास | Prachin Bharat ka Itihas

- श्रेणी: इतिहास / History
- लेखक: डॉ. गिरिजा शंकर - Dr Girija Shankar
- पृष्ठ : 348
- साइज: 19 MB
- वर्ष: 1955
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ का सारांश प्राचीन भारत के इतिहास और उसकी अध्ययन पद्धति पर केंद्रित है। लेखक डॉ. गिरिजा शंकर प्रसाद मिश्र ने इस पुस्तक के माध्यम से प्राचीन भारत के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पक्षों का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। उन्होंने इतिहास के अध्ययन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया है कि अतीत का समझना वर्तमान और भविष्य के निर्माण में सहायक होता है। पुस्तक में प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों की चर्चा की गई है, जैसे पुरातात्विक साक्ष्य, अभिलेख, सिक्के, स्मारक, और विभिन्न साहित्यिक स्रोत, जिनमें बौद्ध और जैन ग्रंथ, रामायण, महाभारत, और विदेशी विवरण शामिल हैं। विशेष रूप से सिन्धु सभ्यता का उल्लेख किया गया है, जिसे भारतीय सभ्यता का प्राचीनतम चरण माना जाता है। पुस्तक में हरप्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई के माध्यम से सिन्धु सभ्यता के अवशेषों की खोज का विवरण दिया गया है और यह बताया गया है कि यह सभ्यता केवल पंजाब और सिन्ध के क्षेत्रों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका विस्तार व्यापक भू-क्षेत्र पर था। लेखक ने इस बात पर भी जोर दिया है कि अतीत को समझने के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों और दूसरे विद्वानों के विचारों का सहारा लेना आवश्यक है, जिससे विद्यार्थियों में समालोचनात्मक दृष्टि विकसित हो सके। किताब का उद्देश्य विशेष रूप से स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर लिखा गया है, लेकिन यह स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों के लिए भी लाभप्रद है। अंत में, लेखक ने अपनी पुस्तक को तैयार करने में सहायता करने वालों का आभार व्यक्त किया है और आशा व्यक्त की है कि यह पाठ्य पुस्तक विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.