श्रीरामचरितमानस | Shri Ramcharitmanas in Hindi

By: गोस्वामी तुलसीदास - Goswami Tulsidas
श्रीरामचरितमानस  | Shri Ramcharitmanas in Hindi by


दो शब्द :

इस पाठ में विभिन्न देवी-देवताओं और गुरु की वन्दना की गई है। पहले श्लोक में सरस्वती और गणेश की पूजा की गई है, जिन्हें अक्षरों, अर्थों, रसों और छंदों की कर्त्ता बताया गया है। फिर श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप पार्वती और शड्डूर की वन्दना की गई है, जिनके बिना सिद्धजन ईश्वर को नहीं देख सकते। इसके बाद ज्ञान का प्रतीक गुरु की महिमा का वर्णन किया गया है, जो ज्ञान और प्रकाश का स्रोत हैं। इसके बाद श्रीराम और श्रीसीता की गुणों का वर्णन किया गया है, जिनकी भक्ति से समस्त क्लेश समाप्त होते हैं। राम भगवान को सब कारणों का कारण और हरि कहा गया है, जो संसार के भ्रम में फंसे जीवों के लिए एकमात्र नौका हैं। तुलसीदास ने रामायण में वर्णित कथाओं को अपने अंतःकरण के सुख के लिए विस्तारित किया है। पाठ में गणेशजी की कृपा से सभी कार्यों के सिद्ध होने का उल्लेख है। फिर संतों के समाज की महिमा का गुणगान किया गया है, जिसे तीर्थराज कहा गया है। संतों के संग का महत्व बताते हुए कहा गया है कि वे सबको सुख और कल्याण की ओर अग्रसर करते हैं। संतों की संगति से जीवन में विवेक और सद्गति आती है। इस प्रकार, पाठ में भक्ति, ज्ञान, संतों की महिमा और रामजी की कथा के माध्यम से जीवन के कल्याण और मोक्ष की प्राप्ति के मार्ग का वर्णन किया गया है।


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