मनोविज्ञान | Manovigyan

By: धीरेन्द्र वर्मा - Dheerendra Verma
मनोविज्ञान | Manovigyan by


दो शब्द :

इस पाठ में मनोविज्ञान के अध्ययन की आवश्यकताओं और चुनौतियों पर चर्चा की गई है। लेखिका निर्मला शेरजंग ने यह स्पष्ट किया है कि हिंदी में मनोविज्ञान के लेखकों को विषय की जटिलताओं को सरल और समग्र रूप में प्रस्तुत करने में कठिनाई होती है। पाठकों के लिए मनोविज्ञान के सामान्य ज्ञान को समझाना आवश्यक है ताकि वे गहन विश्लेषण के लिए तैयार हो सकें। लेखिका ने यह भी बताया है कि विभिन्न विचारकों के बीच मतभेदों को सुलझाना और एक समन्वय स्थापित करना कठिन है। इस प्रक्रिया में लेखक की बुद्धिमत्ता और आत्मसंयम की परीक्षा होती है। वह यह चाहती हैं कि पाठक एक समग्र दृष्टिकोण से मनोविज्ञान को समझें, न कि मात्र सतही जानकारी तक सीमित रहें। पुस्तक के उद्देश्यों और उपयोगिता के बारे में बताते हुए, लेखिका ने उल्लेख किया कि यह पुस्तक कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी। इसके अलावा, उन्होंने अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है उन सभी लोगों के प्रति जिन्होंने इस पुस्तक के लेखन में उनकी सहायता की। अंत में, पाठ में मनोविज्ञान के अध्ययन की आवश्यकता और इसके प्रभावी विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। यह भी दर्शाया गया है कि मानसिक विकास एक नियमित प्रक्रिया है, और इसके लिए सही वातावरण और समझ की आवश्यकता होती है।


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