फलदीपिका | Phaldipika

- श्रेणी: ज्योतिष / Astrology मनोवैज्ञानिक / Psychological
- लेखक: गोपेश कुमार ओझा - Gopesh Kumar Ojha
- पृष्ठ : 684
- साइज: 31 MB
- वर्ष: 1946
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दो शब्द :
यह पाठ एक ज्योतिष ग्रंथ के बारे में है, जिसे 'भावार्थबोधिनी फलरूदीपिका' कहा जाता है। यह ग्रंथ पहले दक्षिण भारतीय लिपि 'ग्रथ' में उपलब्ध था और अब इसे हिंदी में प्रस्तुत किया गया है। इसके लेखक श्री मंत्रेश्वर हैं, जिनका जन्म दक्षिण भारत में हुआ था। वे ज्योतिष, वेदांत और अन्य शास्त्रों के ज्ञान में पारंगत थे। इस ग्रंथ में जन्म कुंडली के द्वादश भावों का विस्तृत निरूपण किया गया है, साथ ही इसमें कई ज्योतिषीय योगों का उल्लेख भी है। इसका उद्देश्य पाठकों को ज्योतिष के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराना और उन्हें ज्योतिष की विभिन्न परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में मदद करना है। ग्रंथ में विभिन्न अध्यायों में राशियों, ग्रहों, योगों, भावों, और उनके फलादेश के बारे में जानकारी दी गई है। प्रत्येक अध्याय का विश्लेषण किया गया है, जिसमें ग्रहों के स्वरूप, उनके प्रभाव, और विभिन्न योगों का विवेचन किया गया है। इस ग्रंथ की महत्ता इसलिए है कि यह पाठकों को ज्योतिष की जटिलताओं को समझने में मदद करता है और उन्हें अपने जीवन में ज्योतिष के ज्ञान को लागू करने की प्रेरणा देता है। आशा है कि यह ग्रंथ उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होगा जो ज्योतिष में करियर बनाने की इच्छाशक्ति रखते हैं।
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