अभिज्ञान शकुंतलम | Abhiigyan Shakuntalam

By: बाबूराम त्रिपाठी - Baburam Tripathi
अभिज्ञान शकुंतलम | Abhiigyan Shakuntalam by


दो शब्द :

अभिज्ञानशाकुन्तलम् महाकवि कालिदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध नाटक है, जिसे डॉ. वासुदेवकृष्ण चतुर्वेदी ने संपादित किया है। इस नाटक का अध्ययन करने के लिए विशेष रूप से छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 'आशुबोधिनी' नामक टीका का निर्माण किया गया है। यह टीका आज के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि इसमें न केवल श्लोकों की व्याख्या की गई है बल्कि उनके सरल अर्थ भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे छात्र अपनी परीक्षाओं की तैयारी में सफल हो सकें। टीका में श्लोकों के अनुवाद के साथ-साथ उनका भावार्थ भी स्पष्ट किया गया है, जो कि पाठकों को श्लोकों के गहरे अर्थ को समझने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, टीका में नाटक की संरचना, पात्रों का चित्रण, कालिदास का जीवन और उनके कार्यों का विश्लेषण भी किया गया है। यह सभी सामग्री विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है और उन्हें नाटक की गहराई तक पहुँचने में सहायता करती है। लेखक ने इस टीका में नाटकीय पारिभाषिक शब्दों, संस्कृत व्याकरण, और अन्य महत्वपूर्ण संदर्भों का भी विस्तृत वर्णन किया है। इसमें दिए गए परिशिष्टों के माध्यम से विद्यार्थी आसानी से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। संक्षेप में, यह टीका न केवल नाटक के अध्ययन के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान करती है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए एक सशक्त मार्गदर्शक भी सिद्ध होती है, जिससे वे अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकें और परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकें। डॉ. चतुर्वेदी का यह प्रयास निस्संदेह प्रशंसा के योग्य है, और यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए अत्यधिक उपयोगी और महत्वपूर्ण साबित होगी।


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