श्री विष्णु सहस्त्रनाम (१९९०) ए सी १६७१ | Shree Vishnu Sahasranamam (1990) Ac 1671

By: भोला - Bhola श्री शंकराचार्य - Shri Shankaracharya
श्री विष्णु सहस्त्रनाम (१९९०) ए सी १६७१  | Shree Vishnu Sahasranamam (1990) Ac 1671 by


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश यह है कि यह श्रीविष्णुसहस्रनाम का उपदेश है, जो भगवान विष्णु के अनंत नामों का संग्रह है। इसे पितामह भीष्म ने भगवान के भक्तों को उपदेश किया। पाठ के अनुसार, भगवान के नामों की महिमा अपार है और इन नामों का जप करने से भक्तों को इहलौकिक और पारलौकिक फल की प्राप्ति होती है। भीष्म के अनुसार, भगवान के नामों का यह संग्रह न केवल सुगम और सुंदर है, बल्कि शक्तिशाली भी है, जिससे भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस पाठ में यह भी बताया गया है कि विभिन्न प्राचीन नाम-संग्रह और स्तवन में शब्दों को जोड़ने का कार्य कुशलता से किया गया है, ताकि यह एक अमूल्य वस्तु बन सके। आचार्य श्रीशंकराचार्य ने भी इस पर भाष्य लिखा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। पाठ के अंत में, भक्तों से प्रार्थना की गई है कि वे इस श्रीविष्णुसहस्रनाम का अध्ययन और मनन करें, ताकि वे इसके माध्यम से विशेष लाभ प्राप्त कर सकें। इस प्रकार, यह पाठ भगवान विष्णु के नामों का स्तवन और उनकी पुण्यता को दर्शाता है, और इसे भक्तों के लिए मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


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