सुश्रिता संहिता | Sushrita Sanhita

By: अम्बिका दत्त शास्त्री - Ambika Datt Shastri


दो शब्द :

इस पाठ में विभिन्न प्रकार के रोगों और उनकी चिकित्सा के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें रोगों के नाम, उनके लक्षण, कारण, और चिकित्सा विधियों का वर्णन किया गया है। पाठ के विभिन्न अध्यायों में वत्स, शुक्र, कृष्ण, संगत, दृष्टि, और अन्य रोगों के वर्गीकरण के साथ-साथ उनकी साध्यासाध्यता और चिकित्सा के तरीकों का विवरण दिया गया है। रोगों को विभिन्न श्रेणियों में बांटकर उनके उपचार के लिए विशेष चिकित्सा विधियों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि औषधियों का प्रयोग, तर्पण, स्वेदन, भेदन, तथा अन्य शारीरिक उपचार विधियाँ। इसके अलावा, पाठ में नेत्र रोगों, योनिरोगों, ज्वर, और अन्य शारीरिक विकारों के लक्षण और उपचार के लिए औषधियों और उपायों का भी विश्लेषण किया गया है। इसमें रोगों के कारणों की चर्चा के साथ-साथ उनकी पहचान और रोकथाम के उपाय भी बताए गए हैं। विभिन्न अध्यायों में समर्पित की गई जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि रोगों की चिकित्सा में न केवल रोग के लक्षणों का उपचार आवश्यक है, बल्कि रोग के मूल कारणों की पहचान और उनके उपचार पर भी जोर दिया गया है। यह पाठ चिकित्सा विज्ञान के अध्ययन में सहायक और मार्गदर्शक साबित होता है।


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