पंचतंत्र | Panchtantra by


दो शब्द :

पञ्चतन्त्र भारतीय साहित्य की एक अनमोल कृति है, जिसने न केवल भारत बल्कि अन्य देशों, विशेषकर इस्लामी और यूरोपीय देशों के कहानी-साहित्य को भी प्रभावित किया है। संस्कृत साहित्य के विद्वान डॉ. वि्टरनित्स ने इसे भारतीय कहानी-साहित्य की महत्वपूर्ण देन बताया। पञ्चतन्त्र की कहानियाँ पशु-पंक्तियों के माध्यम से बनाई गई हैं और ये नीतिशास्त्र की गहरी समझ को दर्शाती हैं। इसके लेखक विष्णु शर्मा थे, जिन्होंने इस ग्रंथ को 80 वर्ष की आयु में लिखा, जब उनका ध्यान भौतिक सुखों से विमुख हो चुका था। उन्होंने अपने ग्रंथ में मनु, बृहस्पति, शुक्र जैसे प्राचीन आचार्यों के नीतिशास्त्र का प्रयोग किया। पञ्चतन्त्र की कहानियाँ विभिन्न भाषाओं में अनुवादित हुई हैं। ईरानी सम्राट खुसरो के मंत्री बुजु ए ने इसे "अमृत" की संज्ञा दी और इसे फारसी में अनुवादित किया। इसके बाद यह अरबी, यूनानी, लैटिन, इटालियन और अंततः अंग्रेजी में अनूदित हुआ। इस प्रकार, पञ्चतन्त्र ने विश्व साहित्य में अपनी जगह बनाई और अनेक भाषाओं में इसके अनुवाद हुए। भारत में भी पञ्चतन्त्र की विविध पाठ परंपराएँ मौजूद हैं, जैसे कि तन्त्राख्याविका, दक्षिण भारतीय पञ्चतन्त्र, हितोपदेश और कई अन्य। ये सभी ग्रंथ पञ्चतन्त्र की मूल रचना के विभिन्न रूप हैं, जिनमें से कुछ अब लुप्त हो चुके हैं। पञ्चतन्त्र की कहानियाँ सरलता और चतुराई से भरी हुई हैं, जो न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि शिक्षा भी देती हैं।


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