कौटिल्य अर्थशास्त्र | Arthashastra by Kautilya

By: कौटिल्य, चाणक्य - Kautilya, Chankaya
कौटिल्य अर्थशास्त्र | Arthashastra by Kautilya by


दो शब्द :

यह पाठ कौटिल्य के "अर्थशास्त्र" पर आधारित है, जो एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है। लेखक ने इस ग्रंथ का हिंदी में अनुवाद करने का कार्य किया है ताकि इसे अधिक से अधिक लोग समझ सकें। कौटिल्य, जिनका असली नाम चाणक्य या विष्णुगुप्त था, ने इस ग्रंथ में राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है। लेखक का उद्देश्य यह है कि हिंदी पाठक इस ग्रंथ के माध्यम से प्राचीन भारतीय आर्थिक और राजनीतिक जीवन को समझ सकें। उन्होंने इस ग्रंथ के अध्ययन के दौरान कई शब्दावली को चुना है ताकि अनुवाद सही और सटीक हो सके। पाठ में उल्लेख किया गया है कि अर्थशास्त्र का अध्ययन करने वाले विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए यह अनुवाद बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति को समझने में मदद मिलेगी। लेखक ने यह भी बताया है कि कौटिल्य के विचार और सिद्धांत आधुनिक समय में भी प्रासंगिक हैं। इस ग्रंथ का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह न केवल अर्थशास्त्र बल्कि राजनीति और समाजशास्त्र के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण ज्ञान प्रदान करता है। लेखक ने पाठकों से अपेक्षा की है कि वे इस अनुवाद का लाभ उठाएंगे और प्राचीन भारतीय ज्ञान को समझने की कोशिश करेंगे।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *