दो शब्द :

इस पाठ में लेखक ने भोजपुरी लोक गीतों के संग्रह और उनके महत्व पर चर्चा की है। लेखक, प्रसाद सिंह, ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया है कि कैसे उन्होंने भोजपुरी लोक गीतों का संग्रह करना शुरू किया और इस काम में उन्हें किस प्रकार की प्रेरणा मिली। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर अपनी माताजी, की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है, जिन्होंने उन्हें गीतों की जानकारी और उन्हें संकलित करने में मदद की। लेखक ने उल्लेख किया है कि उन्होंने गीतों को उनके मूल रूप में संकलित करने का प्रयास किया और इसमें किसी प्रकार का संशोधन न करने की कोशिश की। उन्होंने अपनी मेहनत और शोध के परिणामस्वरूप एक पुस्तक तैयार की, जिसमें करुण रस के गीत शामिल हैं। इस पुस्तक के निर्माण में कई लोगों का योगदान रहा है, जिन्हें लेखक ने धन्यवाद दिया है। लेखक ने भोजपुरी लोक गीतों की प्राचीनता और उनके सांस्कृतिक महत्व को भी रेखांकित किया है। वह बताते हैं कि गीतों में विभिन्न रसों का समावेश होता है और भोजपुरी संस्कृति में गीतों का एक खास स्थान है। अंत में, लेखक ने भोजपुरी लोक गीतों के प्रति अपने प्रेम और उन्हें संरक्षित करने के महत्व को व्यक्त किया है।


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