कोक शास्त्र भाग १ | KOK Shastra

By: अज्ञात - Unknown
कोक शास्त्र भाग १  | KOK Shastra by


दो शब्द :

यह पाठ विभिन्न प्रकार की कन्याओं के गुणों और उनके विवाह के परिणामों पर केंद्रित है। इसमें रामदास द्वारा वर्णित कुछ विशेष लक्षणों का उल्लेख किया गया है, जो यह निर्धारित करते हैं कि एक कन्या का पति जीवित रहेगा या उसकी मृत्यु हो जाएगी। उदाहरण के लिए, जिस कन्या के अंगों का आकार और रंग विशेष होते हैं, उसके पति की आयु और भाग्य पर प्रभाव पड़ता है। पाठ में यह बताया गया है कि यदि कन्या के शरीर के कुछ विशेष लक्षण हैं, जैसे उसकी जंघा का आकार या उसकी आंखों का रंग, तो इससे यह तय किया जा सकता है कि उसके पति की मृत्यु कितनी जल्दी होगी। इसके अलावा, कुछ ज्योतिषीय संकेत भी दिए गए हैं, जैसे जन्म का समय और तिथि, जो यह निर्धारित करते हैं कि कन्या 'विष कन्या' है या नहीं। पाठ में यह भी बताया गया है कि रजस्वला अवस्था में स्त्री को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि अन्य पुरुषों से दूरी बनाना, खासकर अपने पती से, ताकि उसके शरीर में किसी प्रकार का पाप न जाए। अंत में, विवाह के समय कन्या की आयु का ध्यान रखने की सलाह दी गई है, जिसमें कहा गया है कि कम उम्र की कन्याओं का विवाह अधिक उचित होता है। सारांश में, यह पाठ कन्याओं के लक्षणों, विवाह के प्रभावों और रजस्वला अवस्था में सावधानियों पर केंद्रित है, जो पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय ज्ञान पर आधारित हैं।


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