प्राचीन भारत की सभ्यता का इतिहास | History of Civilisation in Ancient INDIA

By: कमलाकर तिवारी - KamlakarTiwari श्री गोपालदास - Shree Gopal Das


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय प्राचीन इतिहास और साहित्य के अध्ययन में पश्चिमी विद्वानों के योगदान का वर्णन किया गया है। प्रोफेसर मेक्समूलर जैसे विद्वानों ने संस्कृत और अन्य प्राचीन भाषाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जिससे भारतीय संस्कृति और इतिहास की गहराई को समझने में सहायता मिली है। पाठ में यह बताया गया है कि कैसे 19वीं शताब्दी में यूरोप के विद्वानों ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों का अनुवाद किया और इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति की जड़ों का पता लगाया। विद्वानों ने संस्कृत, लैटिन, और अन्य भाषाओं के बीच संबंधों की खोज की, जिससे यह स्थापित हुआ कि ये भाषाएं एक ही मूल से निकली हैं। इसके अलावा, राजा राममोहन राय और स्वामी दयानंद सरस्वती जैसे भारतीय सुधारकों ने भी प्राचीन साहित्य की ओर ध्यान दिया और इसके अनुवाद का कार्य किया। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय विद्वानों ने पुरातत्व और प्राचीन इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे प्राचीन भारत की समृद्धि और संस्कृति का पता चलता है। पुस्तक का उद्देश्य यह है कि आम लोग भी प्राचीन भारतीय इतिहास को समझ सकें और इसके महत्व को जान सकें। पाठ में यह भी चिंता व्यक्त की गई है कि भारतीय छात्रों को उनके इतिहास की सही जानकारी नहीं मिलती, जिससे उनका ज्ञान अधूरा रह जाता है। इस प्रकार, यह पुस्तक प्राचीन भारतीय इतिहास का एक सरल और स्पष्ट संक्षेप प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।


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