हिंदी साहित्य का इतिहास | Hindi Sahitya ka Itihas

By: रामचंद्र शुक्ल - Ramchandra Shukla
हिंदी साहित्य का इतिहास | Hindi Sahitya ka Itihas by


दो शब्द :

इस पाठ में हिंदी साहित्य के इतिहास की आवश्यकता और विकास की चर्चा की गई है। लेखक ने बताया है कि काशी की नागरी प्रचारिणी सभा ने अज्ञात हिंदी पुस्तकों की खोज के लिए सरकार की सहायता से कई रिपोर्टें प्रस्तुत कीं, जिससे सैकड़ों कवियों और उनके अज्ञात काव्य रचनाओं का पता चला। इसके बाद मिश्रबंधुओं ने इन सामग्रियों का उपयोग कर एक बड़ा कवि-वृत्त-संग्रह प्रकाशित किया। लेखक ने साहित्य के इतिहास को समझने के लिए एक सुसंगत ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित किया है, जिसमें विभिन्न कालों और धाराओं का समावेश किया गया है। उन्होंने साहित्य के विभिन्न कालखंडों और उनके विशेष लक्षणों का उल्लेख किया है। आदिकाल को "वीरगाथा-काल" के रूप में परिभाषित करते हुए, उन्होंने उस काल की प्रमुख रचनाओं और उनके प्रभाव का विवेचन किया है। भक्तिकाल में विभिन्न काव्य धाराओं और उनके उप-विभागों का उल्लेख किया गया है। लेखक ने रीतिकाल के कवियों के परिचयात्मक विवरण को संक्षेप में प्रस्तुत किया है, जबकि आधुनिक काल में गद्य के विकास को महत्वपूर्ण घटना माना है। लेखक ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ प्रसिद्ध कवियों के नाम और रचनाएँ छूट गई हैं, और उन्होंने पाठकों से क्षमा मांगी है। कुल मिलाकर, यह पाठ हिंदी साहित्य के इतिहास पर एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें काल विभाजन, रचनाओं की प्रचुरता और साहित्यिक प्रवृत्तियों का सम्यक् विवेचन किया गया है।


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