हस्त रेखा विज्ञान | Hast rekha vigyan

- श्रेणी: ज्योतिष / Astrology
- लेखक: गोपेश कुमार ओझा - Gopesh Kumar Ojha
- पृष्ठ : 622
- साइज: 16 MB
- वर्ष: 1956
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दो शब्द :
इस पाठ में हस्त-रेखा विज्ञान के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया गया है। इसमें जीवन-रेखा, शीर्ष-रेखा, और अन्य प्रमुख रेखाओं के स्वरूप, गुण और उनके अर्थों का विश्लेषण किया गया है। जीवन-रेखा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य और विभिन्न रोगों के संकेत देती है। पाठ में यह भी बताया गया है कि रेखाओं की गहराई, चौड़ाई और रूप-रंग व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति को दर्शाते हैं। पाठ में भारतीय और पाश्चात्य मतों के बीच के भेद को भी उजागर किया गया है। भारतीय दृष्टिकोण से, रेखाओं का अध्ययन आध्यात्मिक और विज्ञान दोनों दृष्टिकोणों से किया जाता है, जबकि पाश्चात्य दृष्टिकोण अधिक वैज्ञानिक और तात्कालिक होता है। जीवन-रेखा का प्रारंभ, उसकी लम्बाई और गहराई, और उसके विभिन्न लक्षणों के आधार पर व्यक्ति के स्वास्थ्य की भविष्यवाणी की जाती है। इसके अलावा, पाठ में हाथों की संरचना और उनके महत्व के बारे में भी चर्चा की गई है। हाथों के विभिन्न हिस्से और उंगलियों के आकार को भी व्यक्तित्व और मानसिकता के संकेतक के रूप में देखा गया है। यह बताया गया है कि हाथों की विभिन्न मुद्राएं भी व्यक्ति की भावना और मानसिकता को व्यक्त करती हैं। अंत में, यह स्पष्ट किया गया है कि भारत में हस्त-रेखा विज्ञान का प्राचीन और समृद्ध इतिहास है, और यह ज्ञान सदियों से विद्यमान रहा है। पाठ में हस्त-रेखा विज्ञान की गहनता और इसकी वैज्ञानिकता को भी रेखांकित किया गया है, जो इसे एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय बनाता है।
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