रस तंत्र सार व् सीध प्रयोग संग्रह | ras tantra saar and sidh prayog sangrah

By: ठाकुर नाथू सिंह - Thakur Nathu Singh
रस तंत्र सार व् सीध प्रयोग संग्रह | ras tantra saar and sidh prayog sangrah by


दो शब्द :

यह पाठ "कृषा-गोपाल ग्रन्थमाला" का एक भाग है, जिसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा और औषधियों का विवरण प्रस्तुत किया गया है। इसमें यह बताया गया है कि कैसे आयुर्वेद के सिद्धांत और औषधियाँ स्थानीय जनों के लिए लाभकारी हैं। पाठ का आरंभ स्वामीजी महाराज श्री कृष्णानन्दजी के कार्यों और उनके द्वारा स्थापित "कृषा-गोपाल आयुर्वेदिक धर्मार्थ औषधालय" के महत्व को उजागर करते हुए होता है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस औषधालय में रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके संचालन के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। औषधालय के विकास के लिए नए भवनों का निर्माण और एक विद्यालय की स्थापना का विचार भी प्रस्तुत किया गया है। इसके तहत आयुर्वेदिक शिक्षा का महत्व और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, पाठ में यह भी कहा गया है कि आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग से रोगों का उपचार किया जा रहा है और यह विधि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की तुलना में अधिक प्रभावी सिद्ध हो रही है। अंत में, यह निवेदन किया गया है कि समाज के लोग इस सेवा कार्य में सहयोग करें ताकि आयुर्वेदिक चिकित्सा को और अधिक प्रगति दी जा सके। पाठ का निष्कर्ष यह है कि आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है, जो सत्य और अनुभव पर आधारित है, और इसकी विद्यमानता को बनाए रखने के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।


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