भारतीय ज्योतिष विज्ञान | Bhartiya Joyitsh Gyan

- श्रेणी: Magic and Tantra mantra | जादू और तंत्र मंत्र ज्योतिष / Astrology साहित्य / Literature
- लेखक: रवीन्द्र कुमार - Ravindra Kumar
- पृष्ठ : 134
- साइज: 4 MB
- वर्ष: 1661
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दो शब्द :
इस पाठ में ज्योतिष विज्ञान के महत्व और इसकी वैज्ञानिकता पर चर्चा की गई है। लेखक ने बताया है कि ज्योतिष एक प्राचीन विज्ञान है, जिसके प्रति समाज में कई भ्रांतियाँ हैं। जनसामान्य का ज्योतिष के प्रति दृष्टिकोण अक्सर इसे जादू-टोना समझने का होता है, जबकि यह वास्तव में एक व्यवस्थित और अध्ययनशील विज्ञान है। लेखक ने प्राचीन भारत में ज्योतिष के विकास और विद्वानों के सम्मान का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि रामायण और महाभारत के समय ज्योतिष का अध्ययन शस्त्र विद्या के साथ प्रमुख विषय था। इसके अध्ययन की प्रणाली और इसे विज्ञान के रूप में समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। वर्तमान समय में, ज्योतिष का अध्ययन और इसके प्रति जागरूकता की कमी के कारण इसे एक अबूझ पहेली के रूप में देखा जाता है। लेखक ने इस द्विविधता का उल्लेख किया है, जिसमें लोग व्यक्तिगत रूप से ज्योतिष का सहारा लेते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से इसे अस्वीकार करते हैं। इसके पीछे मानसिक कमजोरी और अर्द्धज्ञानी व्यक्तियों द्वारा धन कमाने की प्रवृत्ति शामिल है। लेखक का तर्क है कि ज्योतिष विज्ञान की गहन जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है, ताकि लोग इसके वास्तविक लाभ समझ सकें और अर्द्धज्ञानी व्यक्तियों से बच सकें। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी विज्ञान की तरह, ज्योतिष की भी सीमाएँ होती हैं, और इसके प्रभाव का ज्ञान उस समय के ग्रहों की स्थिति से प्रभावित होता है। अंत में, लेखक ने इस बात पर जोर दिया कि ज्योतिष विज्ञान का अध्ययन और अनुसंधान आवश्यक है, ताकि इसे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझा जा सके और समाज में इसके सही ज्ञान का प्रसार हो सके। प्रस्तुत पुस्तक इस दिशा में एक प्रयास है।
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