गांधी वध क्यों | Ghandi waad kyu?

- श्रेणी: Freedom and Politics | आज़ादी और राजनीति इतिहास / History जीवनी / Biography साहित्य / Literature
- लेखक: गोपाल गोडसे - Gopal Godse
- पृष्ठ : 152
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1973
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दो शब्द :
इस पाठ में विभाजन के समय भारत में हुई हिंसा, विस्थापन और गांधीजी की हत्या के संदर्भ में घटनाओं का वर्णन किया गया है। पाठ में विभाजन के दौरान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हुई हिंसा के भयानक चित्रण के साथ-साथ हिंदू समुदाय के सदस्यों के निर्वासन, उनके साथ हुए अत्याचारों और उनकी पीड़ा का विवरण है। गांधीजी द्वारा किए गए प्रयासों के बावजूद, विभाजन के समय हिंसा और सांप्रदायिक दंगों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। यह पाठ यह दर्शाता है कि किस प्रकार उन दिनों में हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए पलायन कर रहे थे, और किस तरह से उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा था। गांधीजी की हत्या की पृष्ठभूमि में, पाठ में यह भी बताया गया है कि नथूराम गोडसे और उसके अनुयायियों ने किस प्रकार गांधीजी के प्रति अपनी नफरत को व्यक्त किया। इसके अलावा, यह भी उल्लेख किया गया है कि विभाजन के समय हिंदुओं को किस प्रकार से निशाना बनाया गया और उनके साथ बर्बरता की गई। इस पाठ का सारांश इस बात को उजागर करता है कि विभाजन के समय की स्थितियाँ कितनी भयावह और त्रासद थीं, और गांधीजी की हत्या ने उस समय की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को और भी गहरा किया। पाठ में वर्णित घटनाएँ भारत के इतिहास के एक अंधकारमय अध्याय को दर्शाती हैं, जिसमें मानवता की नीचता और असहिष्णुता का सामना करना पड़ा।
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