अछूत कौन और कैसे | Achut kon Aur Kese

By: डॉ भीमराओ रामजी अम्बेडकर - Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar


दो शब्द :

इस पाठ में अछूतपन, उसकी उत्पत्ति और समाज में उसके स्थान के बारे में चर्चा की गई है। लेखक ने अछूतों की स्थिति को समझने के लिए विभिन्न सामाजिक और ऐतिहासिक पहलुओं को छुआ है। उन्होंने बताया है कि अछूतपन केवल सामाजिक नियमों और विश्वासों के कारण नहीं, बल्कि कई अन्य कारकों के कारण भी अस्तित्व में आया है। लेखक ने यह भी बताया कि अछूतों की पहचान और उनके अधिकारों का निर्धारण कैसे किया गया है, और किस प्रकार से समाज में उन्हें नीचा समझा जाता है। अछूतों के जीवन में विभिन्न प्रथाओं और नियमों का जिक्र करते हुए, लेखक ने उन कारणों को उजागर किया है जिनकी वजह से अछूतों को समाज से अलग रखा गया है। पाठ में यह भी बताया गया है कि अछूतपन का समाज में स्थायी रूप से अस्तित्व कैसे बना रहा, और इसके पीछे के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ क्या हैं। लेखक ने यह दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है कि अछूतपन का समझना न केवल सामाजिक समस्या है, बल्कि यह एक गंभीर प्रश्न है जिसका समाधान खोजा जाना चाहिए। इस प्रकार, पाठ न केवल अछूतपन की समझ को विस्तारित करता है, बल्कि यह इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि कैसे यह सामाजिक भेदभाव और जातिवाद की जड़ों से जुड़ा हुआ है।


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