शोध प्राविधि | Shodh Pravidhi

By: विनय मोहन शर्मा - Vinay Mohan Sharma
शोध प्राविधि | Shodh Pravidhi by


दो शब्द :

इस पाठ में शोध-प्रविधि की महत्वपूर्णता और उसमें आने वाली समस्याओं पर चर्चा की गई है। इसमें बताया गया है कि देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में शोध कार्य हो रहा है, लेकिन बहुत से शोधार्थी इसे उपाधि प्राप्त करने और जीविका के लिए कर रहे हैं, न कि ज्ञान की भक्ति के लिए। शोध कार्य में संकलन का भाग अधिक होता है और वैज्ञानिकता का अभाव होता है। लेखक ने स्वामी श्री प्रत्यगात्मानन्द के विचारों के माध्यम से बताया है कि शोध में विद्या, श्रद्धा और उपनिषद् का होना आवश्यक है। शोध की सही प्रविधि का ज्ञान न होने पर शोधार्थी को श्रद्धा और लगन नहीं हो पाती, जिससे शोध का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। इसके अतिरिक्त, शोध विषय पर एकाधिक शोध कार्यों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए एक ही दृष्टिकोण से शोध नहीं करने की सलाह दी गई है। पुस्तक में शोध की प्रक्रिया, प्रकार, समीक्षा और सामग्री संग्रह के तरीकों पर प्रकाश डाला गया है। सामग्री की प्रामाणिकता की परीक्षा और विभिन्न स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने की महत्ता को भी रेखांकित किया गया है। अंत में, लेखक ने शोध-प्रविधि के विभिन्न पहलुओं को समझाने के लिए इस पुस्तक को निर्देशिका के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे शोधार्थियों को इससे लाभ हो सके।


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