सेवासदन | Seva sadan

By: प्रेमचंद - Premchand
सेवासदन | Seva sadan by


दो शब्द :

"सेवासदन" उपन्यास में प्रमुख पात्र दारोगा कृष्णचन्द्र हैं, जो अपने ईमानदारी और सरलता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने 25 साल के करियर में हमेशा सही मार्ग पर चलने की कोशिश की, लेकिन अब अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनकी पत्नी गंगाजली और दो बेटियाँ हैं, जिनकी शादी के लिए दारोगा जी को दहेज की चिंता सताती है। दारोगा जी को अपने मातहतों और अफसरों के प्रति कोई सम्मान नहीं मिलता। वे ईमानदारी से काम करते हैं, परंतु उन्हें अपने खर्चों और बेटियों की शादी के लिए पैसे जुटाने की चिंता है। जब उनकी बड़ी बेटी सुमन विवाह योग्य होती है, तो दारोगा जी को एहसास होता है कि उनकी निस्पृहता के कारण उन्हें दहेज के लिए पैसों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उपन्यास में महन्त रामदास का भी उल्लेख है, जो इलाके में दान-पुण्य और यज्ञों के द्वारा अपनी शक्ति और प्रभाव बनाए रखते हैं। महन्त जी की दान-लिप्सा और धन की ताकत से दारोगा जी का सामना होता है जब एक गरीब किसान चेतू की हत्या के मामले में उन्हें जांच करनी पड़ती है। कृष्णचन्द्र अपनी ईमानदारी और सदाचार पर गर्व करते थे, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वे भी धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की ओर बढ़ें। अंत में, वे यह सोचने पर मजबूर होते हैं कि अगर उन्होंने गलत रास्ता अपनाया होता, तो शायद उनके लिए जीवन आसान होता। इस तरह, "सेवासदन" में प्रेमचन्द ने सामाजिक दुष्कृत्यों और ईमानदारी के बीच संघर्ष को चित्रित किया है, साथ ही दहेज प्रथा और सामाजिक दबावों पर भी प्रकाश डाला है।


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