भाषा विज्ञानं | Bhasha Vigyan

- श्रेणी: भाषा / Language साहित्य / Literature
- लेखक: डॉ भोलानाथ तिवारी - Dr. Bholanath Tiwari
- पृष्ठ : 604
- साइज: 25 MB
- वर्ष: 1951
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दो शब्द :
यह पाठ डॉ. भोलानाथ तिवारी द्वारा लिखित "भाषा-विज्ञान" पर आधारित है, जिसमें भाषा-विज्ञान के विभिन्न पहलुओं का समावेश किया गया है। इस पुस्तक की भूमिका में डॉ. धीरेन्द्र वर्मा ने उल्लेख किया है कि हिंदी में भाषा-विज्ञान से संबंधित साहित्य की कमी है, और इस पुस्तक के माध्यम से इस कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है। लेखक ने विभिन्न विद्वानों के कामों का संदर्भ देते हुए यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है और यह पुस्तक न केवल उच्च शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों के लिए, बल्कि सामान्य पाठकों के लिए भी उपयोगी होगी। पुस्तक में आधुनिकतम विचारों और शोधों को सम्मिलित करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में भाषा के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि व्याकरण, ध्वनि-विज्ञान, अर्थ-विज्ञान, और भाषा की उत्पत्ति आदि का विस्तार से अध्ययन किया गया है। लेखक ने यह भी बताया है कि भाषा परंपरागत और सामाजिक वस्तु है, जो निरंतर विकसित होती रहती है। इसमें भाषा के विभिन्न रूपों, बोलियों और भाषाओं के वर्गीकरण, और भाषा के विकास के कारणों का भी विश्लेषण किया गया है। लेखक ने यह संकेत दिया है कि भाषा केवल एक संचार का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, समाज और मानवता की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुल मिलाकर, यह पुस्तक भाषा-विज्ञान के जटिल विषय को सरलता से समझाने का प्रयास करती है और इसे अध्ययन करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है।
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