वैशाली की नगर वधु | Vaishali ki nagar vadhu

By: आचार्य चतुरसेन शास्त्री - Acharya Chatursen Shastri
 वैशाली की नगर वधु | Vaishali ki nagar vadhu by


दो शब्द :

यह पाठ देवी अम्बपाली की भव्यता और उनके प्रति लोगों की भक्ति का वर्णन करता है। पाठ की शुरुआत में अम्बपाली का स्वागत किया जा रहा है, जहाँ प्रांगण में विभिन्न वाहनों और लोगों की भीड़ है। अम्बपाली ने भव्य वस्त्र और आभूषण पहन रखे हैं, और जब वे रथ से उतरती हैं, तो लोगों में उल्लास की लहर दौड़ जाती है। उनकी सुंदरता और सजावट देखकर लोग उनकी जय-जयकार करते हैं। अम्बपाली अपने रथ पर सवार होकर नगर की ओर चलती हैं, जहाँ लोगों ने उनके स्वागत के लिए तोरण और रंग-बिरंगे फूल सजाए हैं। जैसे-जैसे वे आगे बढ़ती हैं, फूलों की बारिश होती है और लोग उनके प्रति अपने प्रेम का इजहार करते हैं। पाठ में यह भी वर्णित है कि अम्बपाली एक मध्यमवर्गीय जीवन का आनंद ले रही हैं, जहाँ वे अपने दोस्तों और सामंतों के साथ समय बिताती हैं। वे एक बार आखेट का प्रस्ताव स्वीकार करती हैं और पुरुष वेश में तैयार होती हैं। इस दौरान, वे साहसी सामंतों के साथ वन में प्रवेश करती हैं, जहाँ वे शिकार का आनंद लेती हैं। आखिर में, पाठ देवी अम्बपाली की जीवंतता और उनके साहस को दर्शाता है, जो उनके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पाठ में समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और आनंद की भावना भी स्पष्ट होती है।


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