कामायनी | Kamayani

By: जयशंकर प्रसाद - jayshankar prasad


दो शब्द :

इस पाठ में "कामायनी" नामक काव्य की चर्चा की गई है, जिसमें मानवता के आदिपुरुष मनु और श्रद्धा के सहयोग से मानवता के विकास की कथा का वर्णन है। मनु को भारतीय इतिहास का आदिपुरुष माना गया है, जो मानवता के नवयुग का प्रवर्तक है। पाठ में बताया गया है कि विभिन्न वेदों और पुराणों में मनु की कथा बिखरी हुई है और उसे ऐतिहासिक पुरुष के रूप में मान्यता दी गई है। मनु और श्रद्धा के साथ मिलकर मानवता की सृष्टि की गई, जो एक गहन भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। श्रद्धा की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है, जिससे मानवता का विकास संभव हुआ। पाठ में जल-प्लावन की घटना का भी उल्लेख है, जो मानवता की एक नई संस्कृति की स्थापना का प्रतीक है। इसके साथ ही, इड़ा नामक देवी का भी उल्लेख किया गया है, जो मनु के साथ जुड़ी हुई हैं और बुद्धि, चेतना और शासन का प्रतीक मानी जाती हैं। इड़ा के माध्यम से मनु ने अपनी संस्कृति का विकास किया, लेकिन इसके परिणामस्वरूप उसे देवताओं के कोप का सामना करना पड़ा। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि मानवता के विकास में मन, श्रद्धा और इड़ा के बीच संबंध और संघर्ष महत्वपूर्ण हैं। अंत में, "कामायनी" की कथा को समझने के लिए थोड़ी कल्पना का सहारा लिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह काव्य केवल एक कहानी नहीं, बल्कि मानवता की गहरी भावनाओं और विचारों का प्रतीक है।


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