रस तंत्र सार व् सिद्ध प्रयोग संग्रह खंड-२ | Ras tantra saar and Sidh prayog sangrah part-2

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद Magic and Tantra mantra | जादू और तंत्र मंत्र ज्योतिष / Astrology
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 532
- साइज: 25 MB
- वर्ष: 1952
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दो शब्द :
इस पाठ "सतन्त्रखार व खिद्धप्रयोगसंग्रह (द्वितीय खण्ड)" का सारांश इस प्रकार है: यह पुस्तक आयुर्वेद पर आधारित है और इसमें विभिन्न औषधियों और उनके प्रयोगों का संग्रह प्रस्तुत किया गया है। इसके प्रकाशक कृष्णुगोपाल आयुर्वेदिक धर्मार्थ औषधालय हैं। पुस्तक का उद्देश्य उन चमत्कारिक औषधियों और प्रयोगों की जानकारी देना है, जिन्होंने गंभीर रोगियों को स्वस्थ किया है। इसमें प्राचीन ऋषियों और सिद्धों द्वारा विकसित औषधियों का वर्णन किया गया है, जो घरेलू उपचार के लिए भी उपयोगी हैं। पुस्तक में विशेष रूप से उन औषधियों का उल्लेख है, जो विभिन्न रोगों के उपचार में सहायक होती हैं। इसमें प्रयोगों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिससे पाठक उन्हें आसानी से समझ सकें और उपयोग कर सकें। लेखक ने उन चिकित्सकों और विद्वानों को भी ध्यान में रखा है, जो आयुर्वेद के प्रति रुचि रखते हैं और इसका लाभ उठाना चाहते हैं। इस खण्ड में कई प्रकार के रोगों के लिए औषधियों का वर्णन किया गया है, जैसे वात, पित्त, कफ, ज्वर, और अन्य विभिन्न रोगों का निदान। इसके अलावा, इसमें औषधियों के गुण, उनका उपयोग और निर्माण विधि भी दी गई है। लेखक ने यह भी बताया है कि इस पुस्तक से पाठक अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं और आयुर्वेद के माध्यम से प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ उठा सकते हैं। संक्षेप में, यह पुस्तक आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो पाठकों को स्वास्थ्य संबंधित ज्ञान प्रदान करती है और रोगों के उपचार के लिए उपादेय औषधियों की जानकारी देती है।
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