अँधा युग | Andha yug

By: धर्मवीर भारती - Dharmvir Bharati
अँधा युग | Andha yug by


दो शब्द :

"अंधा युग" एक नाटक है, जिसे धर्मवीर भारती ने लिखा है। यह महाभारत के युद्ध के बाद की परिस्थितियों को दर्शाता है, जब समाज में अंधकार, अन्याय और अधर्म का राज होता है। लेखक ने यह कृति लिखने के पीछे की प्रेरणा का वर्णन किया है कि किस प्रकार उन्होंने सत्य और प्रकाश की खोज में इस कठिन कार्य को स्वीकार किया। उन्हें यह डर भी था कि इस विषय पर लिखना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन उन्होंने अपने अंदर के नशे और सत्य की खोज की चाह को प्राथमिकता दी। नाटक की कथावस्तु महाभारत के उत्तरार्ध की घटनाओं पर आधारित है, जिसमें पात्रों के माध्यम से युद्ध के बाद के अंधकार और पतन की स्थिति को चित्रित किया गया है। इसमें दो प्रहरी हैं जो घटनाओं का वर्णन करते हैं, और यह प्रतीकात्मकता को दर्शाते हैं। नाटक में पात्रों की संवाद शैली और मंच का विधान सरल रखा गया है, जहाँ कथा गायक और विभिन्न दृश्य बदलावों का उपयोग किया गया है। यह नाटक न केवल ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करता है बल्कि वर्तमान समाज में व्याप्त समस्याओं और अंधकार की ओर इशारा करता है। कथावस्तु के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जब समाज में अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब सत्य और न्याय की स्थापना के लिए संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है। "अंधा युग" एक चेतावनी है कि अगर हम अपने मूल्यों को भूलेंगे, तो इसका परिणाम हमें भयानक स्थिति में डाल सकता है। यह नाटक एक ऐसी दुनिया की चित्रण करता है, जहाँ सभी रंग और रोशनी गुम हो गई हैं और केवल अंधकार ही रह गया है।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *