ग्रह नक्षत्र (१९५५) | Grah Nakshatra(1955)

By: त्रिवेणीप्रसाद सिंह - Triveni Prasad Singh
ग्रह नक्षत्र (१९५५) | Grah Nakshatra(1955) by


दो शब्द :

इस पाठ में बिहार-राष्ट्रभाषा-परिषद् द्वारा प्रकाशित एक वैज्ञानिक पुस्तक का परिचय दिया गया है, जिसका लेखक त्रिवेणीप्रसाद सिंह हैं। यह पुस्तक मुख्यतः खगोल विज्ञान पर केंद्रित है और इसका उद्देश्य हिंदी में वैज्ञानिक साहित्य को समृद्ध करना है। लेखक ने इस पुस्तक को लिखने का निर्णय तब लिया जब उन्होंने अपने मित्रों के बच्चों को तारों के नाम हिंदी में बताने का प्रयास किया, जिससे उन्हें भारतीय नामों की आवश्यकता का अनुभव हुआ। लेखक ने विभिन्न तारों और नक्षत्रों के बारे में जानकारी इकट्ठा की और भारतीय संदर्भ में एक पुस्तक तैयार की। उन्होंने इसमें प्राचीन भारतीय ज्योतिष और आधुनिक पाश्चात्य ज्ञान का समावेश किया है। पुस्तक में खगोल विज्ञान के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ तारों के नाम, उनके स्थान और उनकी गति पर भी चर्चा की गई है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक का उद्देश्य पाठकों को खगोल विज्ञान के प्रति जागरूक करना और इस क्षेत्र में मौलिक ज्ञान प्रदान करना है। लेखक ने आशा व्यक्त की है कि पाठक इस पुस्तक से लाभ उठाएंगे और खगोल विज्ञान के अध्ययन में रुचि बढ़ाएंगे। उन्होंने पुस्तक के निर्माण में विभिन्न सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है और पाठकों से त्रुटियों के बारे में सूचित करने का अनुरोध किया है ताकि भविष्य में सुधार किया जा सके। कुल मिलाकर, यह पाठ खगोल विज्ञान को हिंदी में प्रस्तुत करने के प्रयास और इसके महत्व को उजागर करता है, साथ ही लेखक की व्यक्तिगत यात्रा और प्रेरणा को भी दर्शाता है।


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