दो शब्द :

इस पाठ में लेखक ने एक महत्वपूर्ण और उपयोगी ग्रंथ "योगिनी तंत्र" का परिचय दिया है, जिसे पण्डित कनहैयाराटमिश्र ने प्रस्तुत किया है। लेखक ने पाठकों को इस ग्रंथ के प्रति आभार व्यक्त किया है और बताया है कि यह ग्रंथ साधकों के लिए एक अद्भुत साधना विधि प्रदान करता है। लेखक ने ध्यान दिलाया कि योगिनी तंत्र में देवी की उपासना और उसके अनुष्ठान विधियों का विस्तार से वर्णन किया गया है। साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि इस ग्रंथ में विभिन्न तंत्रों, मंत्रों, और साधनाओं के बारे में जानकारी दी गई है, जो साधना करने वालों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं। इस ग्रंथ का उद्देश्य साधना को सरल और सुलभ बनाना है, ताकि आम व्यक्ति भी इसे आसानी से समझ सके और इसका लाभ उठा सके। लेखक ने यह भी बताया कि इस पुस्तक में तंत्र शास्त्र के गूढ़ रहस्यों का उद्घाटन किया गया है, जिससे साधक अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त कर सकते हैं। अंत में, लेखक ने पाठकों से निवेदन किया है कि वे इस ग्रंथ का अध्ययन करें और इसके माध्यम से अपनी साधना को सफल बनाएं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि किसी प्रकार की त्रुटियाँ हो जाएं तो पाठक उन्हें क्षमा करें और आगे के संस्करण में सुधार का आश्वासन दिया।


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