राजतरंगिणी | Raj Tarangini

By: कल्हाना - Kalhana रघुनाथ सिंह - Raghu Nath singh
राजतरंगिणी  | Raj Tarangini by


दो शब्द :

इस पाठ में लेखक ने अपने बचपन की यादों को साझा किया है, जिसमें काशी और कश्मीर के राजाओं का उल्लेख किया गया है। लेखक ने अपने बचपन में काशी में राजाओं की उपस्थिति, उनके ठाट-बाट और साधारणता का वर्णन किया है। काशी के राजा, काइमीर के राजा और उनके परिवारों की परंपराएं, उनकी धार्मिक आस्थाएं और राजनीतिक विचारधाराएं पाठ में प्रमुखता से उभरी हैं। लेखक ने यह भी बताया है कि उनके परिवार में स्वतंत्रता संग्राम के प्रति जागरूकता थी और उनके कई रिश्तेदार इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे। काइमीर के राजा का काशी में आना-जाना, उनके सरल स्वभाव और आम लोगों के साथ व्यवहार का उल्लेख करते हुए लेखक ने यह महसूस किया कि ये रियासतें भारतीय संस्कृति और इतिहास का हिस्सा हैं। पाठ में काशी और काइमीर के बीच के संबंधों को दर्शाते हुए, लेखक ने यह भी बताया कि कश्मीर की खूबसूरती और वहां के लोगों की भलाई के लिए उनके मन में एक विशेष आदर था। अंत में, लेखक ने अपने प्रयासों का उल्लेख किया कि कैसे उन्होंने काइमीर के इतिहास को समझने और उसे अन्य लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। कुल मिलाकर, यह पाठ काशी और काइमीर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों, स्वतंत्रता संग्राम में परिवार की भागीदारी और लेखक के व्यक्तिगत अनुभवों का समावेश है।


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