मानक हिंदी व्याकरण | Manak Hindi Grammer

- श्रेणी: भाषा / Language साहित्य / Literature हिंदी / Hindi
- लेखक: रामचन्द्र वर्मा - Ramchandra Verma
- पृष्ठ : 168
- साइज: 11 MB
- वर्ष: 2018
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: पुस्तक "मानक हिन्दी व्याकरण" के लेखक रामचन्द्र वर्मा हैं, और इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को हिन्दी व्याकरण की जटिलताओं से परिचित कराना है। यह व्याकरण विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है ताकि उन्हें सरल और मनोरंजक तरीके से व्याकरण का ज्ञान प्राप्त हो सके। इसमें विभिन्न शब्द-भेदों की नवीन व्याख्या की गई है और विषयों का विभाजन भी नया ढंग से किया गया है। लेखक का मानना है कि यह व्याकरण अन्य व्याकरणों की तुलना में अधिक उपयोगी और महत्त्वपूर्ण होगा। व्याकरण का महत्व बताते हुए कहा गया है कि यह भाषा के नियमों का संग्रह है, जो भाषा के विकास और परिवर्तन के साथ बदलते रहते हैं। व्याकरण हमें वक्ता या लेखक का आशय समझने में मदद करता है और भाषा की शुद्धता बनाए रखने में सहायक होता है। व्याकरण के अध्ययन से भाषा का स्वरूप बिगड़ने से बचता है, जैसे संस्कृत भाषा का जीवित रहना उसकी उच्चकोटि की व्याकरण पुस्तकों के कारण संभव हुआ है। दूसरे अध्याय में वर्ण-मेद (ध्वनियों और अक्षरों) के बारे में चर्चा की गई है। मनुष्यों के पास विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ बनाने की क्षमता होती है, जिसका कारण उनके विकसित मस्तिष्क और बोलने के अंग हैं। ध्वनियों का उच्चारण करते समय मुँह के विभिन्न अंगों का उपयोग किया जाता है। विभिन्न ध्वनियों को उनके उच्चारण के स्थान के अनुसार वर्गीकृत किया गया है, जैसे कंठ्य, तालव्य, मूर्धन्य, दंत्य, ओष्ठ्य और अनुनासिक ध्वनियाँ। व्याकरण के अध्ययन से विद्यार्थियों को शब्दों की संरचना, उनके उच्चारण और उनके अर्थ को समझने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी भाषा कौशल में सुधार होगा।
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