चन्द्रगुप्त मौर्य | Chandragupt Maurya

By: जयशंकर प्रसाद - jayshankar prasad


दो शब्द :

"चन्द्रगुप्त मौर्य" जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखा गया एक ऐतिहासिक नाटक है, जो चन्द्रगुप्त मौर्य के समय और उनके द्वारा स्थापित साम्राज्य के इतिहास को प्रस्तुत करता है। प्रसाद ने इस नाटक के माध्यम से चन्द्रगुप्त के जीवन और उनके साम्राज्य के उत्थान को दर्शाने का प्रयास किया है। इस नाटक के प्रकाशन से पहले, चाणक्य द्वारा लिखित "अर्थशास्त्र" का अवलोकन तथा चन्द्रगुप्त के बारे में ऐतिहासिक तथ्यों का संकलन किया गया। प्रसाद की लेखनी में मौलिकता और गहराई है, जो पाठकों को भारतीय इतिहास के इस महत्वपूर्ण काल में ले जाती है। चन्द्रगुप्त का समय एक ऐसे परिवर्तनकारी दौर का प्रतीक था, जब जाति, समाज और धर्म में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो रहे थे। यह वह समय था जब जैन धर्म का प्रचार-प्रसार हो रहा था और भारतीय समाज में विभिन्न जातियों का उदय हो रहा था। प्रसाद ने इस ग्रंथ में चन्द्रगुप्त के साम्राज्य के निर्माण की प्रक्रिया, उनके संघर्ष, और उनके द्वारा स्थापित शासन की विशेषताओं का वर्णन किया है। चन्द्रगुप्त का साम्राज्य न केवल शक्ति और वैभव का प्रतीक था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और धर्म के विकास में भी एक महत्वपूर्ण चरण था। इस नाटक का महत्व इस बात में है कि यह न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत करता है, बल्कि पात्रों के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक बदलावों का भी चित्रण करता है, जिससे पाठक को उस काल का यथार्थ अनुभव होता है।


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