भारतीय वास्तु शास्त्र प्रतिमा विज्ञान | Bhartiya vastu shastra pratima vigyan

By: द्विजेन्द्र नाथ शुक्ल - Dr. Dwijendra Nath Shukl
भारतीय वास्तु शास्त्र प्रतिमा विज्ञान | Bhartiya vastu shastra pratima vigyan by


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय वास्तुशास्त्र और प्रतिमा-विज्ञान के अध्ययन की महत्वपूर्ण बातें प्रस्तुत की गई हैं। लेखक डॉ. द्विजेन्द्रनाथ शुक्ल ने इस ग्रंथ के माध्यम से प्रतिमा-विज्ञान के सिद्धांतों और पूजा परंपरा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण का विवेचन किया है। पाठ में विभिन्न शक्ति-पीठ और उनके महत्व का उल्लेख किया गया है, जहां देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। भारतीय संस्कृति में प्रतिमा पूजा के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझते हुए, लेखक ने यह बताया है कि कैसे विभिन्न धार्मिक परंपराओं में प्रतिमा का स्थान है और पूजा की विधियाँ क्या हैं। लेखक ने इस ग्रंथ को भारतीय वास्तु-शास्त्र के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया है, जिसमें प्राचीन ग्रंथों, पुरातात्त्विक साक्ष्यों और विभिन्न धार्मिक साहित्य का विश्लेषण किया गया है। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि प्रतिमा-विज्ञान के अध्ययन में सही परिणाम प्राप्त करने के लिए गहन अध्ययन और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। इस ग्रंथ में प्रतिमा पूजा की प्राचीनता, विकास और सांस्कृतिक दृष्टिकोण पर ध्यान दिया गया है। लेखक ने इस क्षेत्र में मौलिक अनुसंधान के महत्व को भी रेखांकित किया है, जिससे पाठकों को इस विषय में गहरी जानकारी मिल सके। अंत में, यह बताया गया है कि यह ग्रंथ प्रतिमा-विज्ञान के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ होगा।


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