श्रावण भाद्रपद | Shrawan Bhadrpard

- श्रेणी: Blog and Articles | ब्लॉग और अनुच्छेद
- लेखक: डॉ.सरोजिनी बाबर - Dr. Sarojini babar
- पृष्ठ : 929
- साइज: 61 MB
- वर्ष: 1985
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दो शब्द :
इस पाठ में महाराष्ट्र की लोक संस्कृति और विशेषकर श्रावण और भाद्रपद मास में मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहारों का वर्णन किया गया है। लेखिका ने इन मासों में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार से उल्लेख किया है। श्रावण भाद्रपद का समय विशेष रूप से सण-उत्सवों का होता है, जिसमें नागपंचमी, मंगला गौरी, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और लक्ष्मी पूजा जैसे त्योहार शामिल हैं। इन त्योहारों के दौरान घरों में विशेष तैयारियाँ की जाती हैं, जैसे पूजा की सामग्री की सजावट, पारंपरिक व्यंजन बनाना और सामूहिक रूप से उत्सव मनाना। पाठ में यह भी दर्शाया गया है कि किस प्रकार महिलाएँ और बच्चे इन त्योहारों में सक्रिय भाग लेते हैं, गीत गाते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर आनंदित होते हैं। त्योहारों का आयोजन पारिवारिक और सामाजिक मेलजोल को बढ़ाता है, जिससे समुदाय में एकता और भाईचारे की भावना प्रबल होती है। लेखिका ने इस बात पर भी जोर दिया है कि ये त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि संस्कृति और परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा हैं, जो सामाजिक जीवन में खुशियाँ और उल्लास भरते हैं। त्योहारों के माध्यम से लोगों के बीच संवाद और सहयोग की भावना स्थापित होती है, जो समाज को एकजुट करती है। इस प्रकार, पाठ में महाराष्ट्र की लोक संस्कृति की गहराई और विविधता को उजागर किया गया है, जिसमें त्योहारों की महत्ता और उनके पीछे छिपी परंपराओं का सुंदर चित्रण किया गया है।
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