आसनों का महत्व | Aasano ka mahatva

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद मानसिक शक्ति/ Mansik Shakti योग / Yoga साधना /sadhana
- लेखक: रामनरेश त्रिपाठी - Ramnaresh Tripathi
- पृष्ठ : 172
- साइज: 1 MB
- वर्ष: 1940
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दो शब्द :
इस पाठ में व्यायाम और आसनों के महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक का मानना है कि व्यायाम स्वास्थ्य का सच्चा मित्र है और इसके नियमित अभ्यास से शारीरिक व्याधियों से छुटकारा पाया जा सकता है। लेखक ने अपने अनुभवों का साझा करते हुए बताया है कि आसनों का अभ्यास, विशेषकर युवाओं के लिए, अत्यंत फायदेमंद है। लेखक ने आसनों और शारीरिक व्यायाम के लाभों पर जोर दिया है, यह बताते हुए कि आसनों से न केवल स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी आवश्यक हैं। आसनों के अभ्यास से अवसाद, तनाव और अन्य शारीरिक समस्याओं का समाधान हो सकता है। इसके अलावा, लेखक ने आसनों के अभ्यास के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया है, जैसे कि गुरु की आवश्यकता, ब्रह्मचर्य का पालन, और उचित आहार। आसनों का अभ्यास सुबह के समय करने की सिफारिश की गई है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होता है। पाठ में विभिन्न आसनों की जानकारी और उनके लाभों को भी प्रस्तुत किया गया है, जैसे शीर्षासन, पश्चिमोत्तान आसन, और सवोगासन, जिनसे विभिन्न रोगों में राहत मिलती है। अंत में, लेखक ने आसनों के विभिन्न प्रकारों का वर्गीकरण भी किया है, जिससे पाठक आसानी से आसनों का अभ्यास कर सकें। इस प्रकार, पाठ का मुख्य उद्देश्य पाठक को योग और आसनों के महत्व से अवगत कराना और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।
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