हनुमान बाहुक | Hanuman Bahuk

- श्रेणी: चौपाया और छंद / chaupaya and chhnad
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 204
- साइज: 10 MB
- वर्ष: 1943
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दो शब्द :
इस पाठ में हनुमान बाहुक की महत्ता, उसकी रचना और पाठ के लाभों पर चर्चा की गई है। हनुमान बाहुक, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा, एक स्तोत्र है जिसे विशेष रूप से रोगों से मुक्ति और संकटों से रक्षा के लिए पाठ किया जाता है। गोस्वामी तुलसीदास ने अपने असहनीय दर्द से निजात पाने के लिए हनुमान जी की शरण ली थी और उसी अनुभव से हनुमान बाहुक की रचना की। इस पाठ में हनुमान बाहुक के पाठ की विधियाँ और विभिन्न प्रकार के पाठों का विवरण दिया गया है। पाठ के प्रभावशाली परिणामों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को निरोगी जीवन और मानसिक शांति प्राप्त होती है। पाठ में यह भी बताया गया है कि हनुमान बाहुक का पाठ करने से भूत-प्रेत और अन्य तरह के दुष्ट प्रभावों से सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा, हनुमान बाहुक की विभिन्न प्रतियों और उनके पाठ क्रम में भिन्नताओं का भी उल्लेख किया गया है, साथ ही पाठ के विभिन्न प्रकारों, जैसे 220 दिन का संपुट पाठ या 11 या 22 दिन का विशेष विधान, की जानकारी दी गई है। पाठ के मंत्रों और प्राण-प्रतिष्ठा विधि पर भी चर्चा की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्तोत्र केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। अंत में, पाठ में यह संकल्पित किया गया है कि हनुमान बाहुक का पाठ न केवल भक्ति का माध्यम है, बल्कि यह जीवन में सुख और संतोष लाने का एक प्रभावी उपाय भी है।
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