कामना | Kamna

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel नाटक/ Drama साहित्य / Literature
- लेखक: जयशंकर प्रसाद - jayshankar prasad
- पृष्ठ : 162
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 1984
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दो शब्द :
"कामना" एक नाटक है जिसमें मुख्य पात्र कामना है, जो एक द्वीप पर रहती है। नाटक की शुरुआत कामना के विचारों और भावनाओं से होती है, जहाँ वह अपने मन की बेचैनी और जीवन में कुछ विशेष पाने की इच्छाओं का अनुभव करती है। कामना को अपने चारों ओर की प्राकृतिक सुंदरता भाती है, लेकिन वह इसे पर्याप्त नहीं मानती। कामना के साथ कुछ अन्य पात्र भी उपस्थित हैं, जो उसकी स्थिति को समझने का प्रयास करते हैं। वे उसे तंग करने के बजाय उसका मन बहलाने की कोशिश करते हैं। कामना का मन उदास है और वह अपने भीतर की आकांक्षाओं को व्यक्त नहीं कर पाती। कहानी में एक युवक, विलास, का आगमन होता है जो समुद्र पार से आया है। कामना उसके प्रति आकर्षित होती है और उसकी उपस्थिति से उसके जीवन में एक नया उत्साह आ जाता है। कामना का यह आकर्षण उसके जीवन के अन्य पहलुओं को प्रभावित करने लगता है, जैसे उसकी मित्रता, परिवार और द्वीप के सामाजिक नियम। कामना के मन में विलास के प्रति गहरी भावनाएँ जागृत होती हैं, जबकि उसके चारों ओर के लोग इस नए संबंध को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ व्यक्त करते हैं। नाटक में पात्रों के बीच संवाद और उनके विचारों के माध्यम से कामना के भीतर चल रहे द्वंद्व और उसके सपनों की खोज को दर्शाया गया है। कुल मिलाकर, "कामना" एक भावनात्मक यात्रा है जिसमें मुख्य पात्र अपने भीतर की इच्छाओं और समाज के नियमों के बीच संघर्ष करती है और एक नए अनुभव की ओर बढ़ती है।
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