योगिनीतंत्र | Yogini Tantra

By: पं. कन्हैयालाल मिश्र - Pt. Kanahaiya Lal Mishra


दो शब्द :

इस पाठ में "योगिनीतंत्र" नामक एक महत्वपूर्ण तंत्र ग्रंथ का परिचय दिया गया है, जो भगवान शिव का एक उपासना तंत्र है। लेखक ने इस ग्रंथ के महत्व को उजागर करते हुए बताया है कि यह तंत्र साधना के लिए अत्यंत सरल और उपयोगी है। इसमें विभिन्न मंत्रों और अनुष्ठानों का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिनसे साधक लाभ उठा सकते हैं। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि इस तंत्र में प्राचीन तीर्थों का महत्व, मंत्रों का प्रयोग, और साधना की विधियां शामिल हैं, जो अन्य ग्रंथों में प्राप्त करना कठिन होता है। यह ग्रंथ न केवल तंत्र शास्त्रियों के लिए, बल्कि सामान्य व्यक्तियों के लिए भी लाभकारी है। लेखक ने इस बात पर जोर दिया है कि तंत्र साधना के माध्यम से साधक अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान युग में तंत्र मंत्र की प्रामाणिकता और प्रभावशीलता पर विचार किया गया है। खासकर, कलियुग की कठिनाइयों के बीच, यह तंत्र साधक को त्वरित फल प्रदान करने में सक्षम है। अंत में, लेखक ने पाठकों से अनुरोध किया है कि यदि अनुवाद में कोई त्रुटि हो, तो उसे सुधारने का अवसर प्रदान करें। इस प्रकार, पाठ में "योगिनीतंत्र" के महत्व, इसके साधना विधियों और तंत्र शास्त्र की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया है।


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