रजनीग ध्यान योग | Rajnish dhyan yoga

By: आचार्य श्री रजनीश (ओशो) - Acharya Shri Rajneesh (OSHO)
 रजनीग ध्यान योग | Rajnish dhyan yoga by


दो शब्द :

इस पाठ में ध्यान योग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है, जो भगवान श्री रजनीश द्वारा रचित हैं। इसमें ध्यान की वैज्ञानिक दृष्टि, ध्यान की विधियाँ, साधना के सोपान, और ध्यान से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान प्रस्तुत किया गया है। ध्यान को एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में समझाया गया है, जिसमें मन की स्थिति को नियंत्रित करने और आत्म-ज्ञान की प्राप्ति पर जोर दिया गया है। रजनीश ने ध्यान को जीवन का अमृत बताया है और इसके अभाव को मन की उपस्थिति से जोड़ा है। ध्यान के विभिन्न सोपान और तकनीकों की सूची दी गई है, जैसे कुण्डलिनी ध्यान, नटराज ध्यान, प्रार्थना ध्यान आदि। साधना के सोपान में रजनीश ने 29 विधियों का उल्लेख किया है, जो साधकों को आत्म-ज्ञान की ओर ले जाती हैं। साधना सूत्र में ध्यान और उसके विभिन्न पहलुओं पर गहराई से विचार किया गया है। ध्यान की प्रक्रिया में साधकों को अनुभवों, भावनाओं, और मन की गतिविधियों के प्रति उदासीन रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि वे अपने अनुभवों को सही तरीके से समझ सकें। रजनीश ने ध्यान के दौरान होने वाली विभिन्न शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रियाओं को स्वीकार करने का महत्व बताया है, जैसे ऊर्जा का जागरण, शरीर की शून्यता का अनुभव आदि। अंततः, ध्यान का अभ्यास करने वाले साधकों को 21 दिनों के प्रयोग के दौरान अपने अनुभवों को लिखने से रोकने और ध्यान के विकास पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया गया है। इस प्रकार, पाठ ध्यान योग की गहराई, विधियाँ, और साधना की प्रक्रिया को समझाने में महत्वपूर्ण है।


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