आषाढ़ का एक दिन | Aashad ka Ek Din

- श्रेणी: कहानियाँ / Stories नाटक/ Drama
- लेखक: मोहन राकेश - Mohan Rakesh
- पृष्ठ : 130
- साइज: 3 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में हिंदी रंगमंच की परंपरा और उसकी विशेषताओं पर चर्चा की गई है। लेखक ने यह बताया है कि हिंदी नाटक का रंगमंच पश्चिमी रंगमंच से भिन्न है और इसे अपने सांस्कृतिक मूल्यों के अनुसार विकसित करने की आवश्यकता है। लेखक का मानना है कि हिंदी रंगमंच को हिंदी-भाषी क्षेत्रों की सांस्कृतिक धरोहरों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए और यह हमारे जीवन के रंगों और संवेदनाओं को प्रकट करना चाहिए। इसके बाद, एक नाटक का दृश्य प्रस्तुत किया गया है जिसमें एक वृद्धा (अम्बिका) और उसकी पुत्री (मल्लिका) के बीच बातचीत हो रही है। मल्लिका बारिश से भीगकर घर लौटती है और अपनी मां से अपने अनुभव साझा करती है। वह प्राकृतिक सौंदर्य और वर्षा के अनुभव को अद्भुत बताती है। अम्बिका अपने काम में व्यस्त है और मल्लिका की बातें सुनती है। दोनों के बीच संवाद में मल्लिका अपनी भावनाओं को व्यक्त करती है, जबकि अम्बिका अपनी चिंताओं को छुपाने की कोशिश करती है। मल्लिका के जीवन में विवाह की चर्चा भी होती है, जिसमें वह अपने अधिकारों और अपनी इच्छाओं की बात करती है। इस प्रकार, पाठ में रंगमंच की सांस्कृतिक दृष्टि और नाटक के माध्यम से व्यक्तिगत और सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाया गया है।
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