सुखसागर | Sukh Sagar

- श्रेणी: धार्मिक / Religious भजन और कथाएं /Bhajan & Kathayein साहित्य / Literature हिंदू - Hinduism
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 905
- साइज: 158 MB
- वर्ष: 1923
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दो शब्द :
यह पाठ श्रीमद्भागवत की महिमा और इसके महत्व को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि इस ग्रंथ को सुनने और पढ़ने से मनुष्य को भवसागर से पार होने का अवसर मिलता है। साथ ही, यह भी वर्णित है कि भगवान श्रीकृष्ण के अवतार और उनकी लीलाओं का वर्णन इस ग्रंथ में किया गया है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति की प्राप्ति होती है। पाठ में यह भी उल्लेखित है कि भगवान श्रीकृष्ण ने जन्नत में अवतार लेकर अपने भक्तों को सुख प्रदान करने एवं उनके पापों को मिटाने के लिए कथा का प्रसार किया। भक्तों को यह संदेश दिया गया है कि इस कथा का श्रवण और अध्ययन करने से वे पवित्रता और मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकते हैं। इसके अलावा, पाठ में संतों और महात्माओं के चरणों में समर्पण की बात की गई है और यह भी बताया गया है कि यह ग्रंथ सभी के लिए, चाहे वे ज्ञानी हों या अज्ञानी, एक मार्गदर्शक है। अंत में, यह प्रार्थना की गई है कि सभी भक्त इस कथा को सुनें और इससे लाभान्वित हों, ताकि वे अपने जीवन में सुख और शांति प्राप्त कर सकें। इस प्रकार, यह पाठ श्रीमद्भागवत के प्रति श्रद्धा और भक्ति को बढ़ाने का एक माध्यम है और इसे पढ़ने से एक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है।
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