संस्कृत व्याकरण प्रवेशिका | Sanskrit Vyakaran Praveshika

- श्रेणी: भारत / India संस्कृत /sanskrit
- लेखक: बाबूराम सक्सेना - Baburam Saksena
- पृष्ठ : 600
- साइज: 11 MB
- वर्ष: 1958
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक वाबुराम सक्सेना ने संस्कृत-व्याकरण पर आधारित एक पुस्तक की भूमिका प्रस्तुत की है, जो कि पहले से प्रकाशित संस्करणों के संशोधित और परिवर्धित रूप में है। लेखक ने बताया कि पहली बार यह पुस्तक बारह-तेरह वर्ष पूर्व प्रकाशित हुई थी, जब हिंदी माध्यम से संस्कृत पढ़ाई का चलन कम था। उस समय अंग्रेजी का प्रभाव अधिक था, लेकिन अब हिंदी में संस्कृत-व्याकरण की एक समुचित और संपूर्ण पुस्तक की आवश्यकता थी। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि इस पुस्तक में हिंदी भाषा के उदाहरणों के माध्यम से संस्कृत व्याकरण को समझाने का प्रयास किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को विषय को समझने में आसानी हो। पाणिनि की विधियों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है और उदाहरणों से व्याख्या की गई है। संस्कृत शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए लेखक ने बताया कि यह पुस्तक छात्रों और अध्यापकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने पुस्तक के पहले संस्करण को अपने गुरु को समर्पित किया, जिनका प्रभाव उनके लेखन पर रहा। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन में उनकी सहायता करने वाले शिष्यों का भी उल्लेख किया है और कहा है कि यह संशोधित संस्करण विद्यार्थियों के लिए अधिक उपादेय साबित होगा। लेखक ने अंत में इस बात की पुष्टि की है कि पुस्तक के प्रकाशन में आने वाली कठिनाइयों के बावजूद, वह इसे पाठकों के सामने प्रस्तुत करने में सफल हुए हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यह पुस्तक संस्कृत के अध्ययन में योगदान देगी और इसके माध्यम से अधिक विद्यार्थियों को संस्कृत सीखने में रुचि होगी।
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