अभिज्ञान शाकुंतलम नाटक | Abhigyan Shakuntalam Natak

- श्रेणी: नाटक/ Drama साहित्य / Literature
- लेखक: कालिदास - Kalidas
- पृष्ठ : 262
- साइज: 18 MB
- वर्ष: 1901
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दो शब्द :
यह पाठ "अभिज्ञान शकुंतला" नामक नाटक पर केंद्रित है, जिसे प्रसिद्ध संस्कृत कवि कालिदास ने लिखा है। नाटक की कथा राजा दुष्यंत और शकुंतला के बीच की प्रेम कहानी के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें राजा दुष्यंत का शकुंतला से मिलना, उनका विवाह, शकुंतला का शापित होना, और अंत में पुनर्मिलन की कथा शामिल है। नाटक के आरंभ में राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रेम कहानी का वर्णन किया गया है, जिसमें वे एक-दूसरे के प्रति अपने भावनाओं को व्यक्त करते हैं। इसके बाद, शकुंतला पर एक ऋषि का शाप लगता है, जिससे वह राजा से अलग हो जाती है। राजा दुष्यंत को शकुंतला की पहचान खोने का दुःख होता है, और वह उसे खोजने निकलता है। यह नाटक प्रेम, तात्कालिकता, और मानव भावनाओं की गहराई को दर्शाता है। इसकी भाषा में संस्कृत और प्राकृत का मिश्रण है, और इसमें कई श्लोक और छंद हैं जो नाटक को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। कालिदास की काव्यात्मक शैली और पात्रों के बीच की संवाद चातुर्य इसे एक अद्वितीय नाटक बनाती हैं। इस नाटक का उद्देश्य मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करना और प्रेम की शक्ति को दर्शाना है। अंततः, राजा और शकुंतला का पुनर्मिलन नाटक का प्रमुख संदेश है, जो यह दर्शाता है कि सच्चा प्रेम हर बाधा को पार कर सकता है।
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