भोजपुरी के कवी और काव्य | Bhojpuri ke kavi and kavya

- श्रेणी: काव्य / Poetry भाषा / Language साहित्य / Literature
- लेखक: श्री दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह - Shri Durga Shankar Prasad Singh
- पृष्ठ : 416
- साइज: 16 MB
- वर्ष: 1958
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दो शब्द :
इस पाठ में बिहार-राष्ट्रभाषा परिषद के कार्यों और भोजपुरी साहित्य के प्रकाशन की प्रक्रिया का विवरण दिया गया है। यह बताया गया है कि परिषद की स्थापना सन् 1640 ई. में हुई थी और इसके अंतर्गत भोजपुरी साहित्य की एक महत्वपूर्ण पुस्तक का संपादन किया गया। इस पुस्तक का संपादन डॉक्टर विश्वनाथ प्रसाद ने किया, जो उस समय पटना विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष थे। पुस्तक के संपादन में कई बाधाएँ आईं, जैसे संपादक का स्वास्थ्य, अन्य शैक्षणिक कार्यों की व्यस्तता, और पांडुलिपि का विशाल आकार। इसके बावजूद, संपादक ने पुस्तक को संक्षिप्त करते हुए आवश्यक संशोधन किए और इसे प्रकाशित करने में सफल रहे। हालांकि, प्रकाशन में कुछ तकनीकी समस्याएँ भी आईं, जिससे दूसरे प्रेस में मुद्रण की व्यवस्था करनी पड़ी। पुस्तक में भोजपुरी की पुरानी सामग्री और कवियों की रचनाएँ सम्मिलित की गई हैं। लेखक ने भोजपुरी के लिए अपने प्रयासों को जारी रखा और परिषद के सहयोग से शोध कार्य किया। पाठ में उल्लेख किया गया है कि भोजपुरी में कविताएँ और साहित्य अब भी महत्वपूर्ण हैं और नए कवियों की रचनाएँ आज भी लोकप्रिय हो रही हैं। इस पाठ का मूल संदेश भोजपुरी भाषा और साहित्य के प्रति निष्ठा और उसकी समृद्धि के प्रयासों के बारे में है। यह बताता है कि कैसे लोक भाषाएँ भी समृद्ध साहित्य का निर्माण कर सकती हैं और इस दिशा में प्रयास आवश्यक हैं। अंत में, पाठक को यह विश्वास दिलाया गया है कि इस पुस्तक से भोजपुरी साहित्य को मान्यता मिलेगी और उसका आदर किया जाएगा।
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