यौन मनोविज्ञान | SEXUAL PSYCHOLOGY

By: अज्ञात - Unknown
यौन मनोविज्ञान | SEXUAL PSYCHOLOGY by


दो शब्द :

इस पाठ में यौन विच्छेद और कामात्मक प्रतीकवाद के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। इसमें यह बताया गया है कि कैसे समाज में यौन संबंधों के दौरान कष्ट और आनंद के बीच का संबंध स्थापित होता है। यौन सादवाद और मासोकवाद की अवधारणाओं को समझते हुए, यह बताया गया है कि कष्ट पहुँचाना या सहन करना केवल यौन इच्छा या आनंद के लिए एक साधन है, न कि इसका उद्देश्य। सादवाद में, व्यक्ति का उद्देश्य अपने और अपने साथी के बीच की भावनाओं को जागरित करना होता है, जबकि मासोकवाद में कष्ट सहन करने पर जोर दिया जाता है। यह भी कहा गया है कि कष्ट का अनुभव यौन उत्तेजना को बढ़ाने में मदद करता है और यह प्रक्रिया आदिम प्रवृत्तियों पर आधारित होती है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रेम में कष्ट पहुँचाना एक सामान्य धारणा है और यह कई संस्कृतियों में प्रचलित है। जानवरों में भी यह देखने को मिलता है कि नर अपने साथी को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न कठोर तरीकों का सहारा लेते हैं। अंत में, पाठ यह स्पष्ट करता है कि यौन आवेग और कष्ट के बीच का संबंध जटिल है, और यह केवल व्यक्तिगत इच्छाओं और प्रवृत्तियों का परिणाम है, न कि किसी क्रूरता का संकेत। सादवाद और मासोकवाद दोनों में इस कष्ट का उपयोग एक साधन के रूप में किया जाता है, जिससे यौन उत्तेजना को बढ़ावा मिलता है।


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