रसीदी टिकट | Rashidi Ticket

By: अमृता प्रीतम - Amrita Pritam
रसीदी टिकट | Rashidi Ticket by


दो शब्द :

"रसीदी टिकट" अमृता प्रीतम की आत्मकथा है, जिसमें वह अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं और अनुभवों को साझा करती हैं। यह कहानी न केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा को दर्शाती है, बल्कि समाज और परिवार के प्रति उनके दृष्टिकोण को भी उजागर करती है। अमृता अपने जीवन के क्षणों को याद करती हैं, जब उन्होंने अपने माता-पिता को स्कूल में पढ़ाते देखा। वह बताती हैं कि उनके पिता ने एक बार प्रार्थना में कहा कि उन्हें एक बेटी दी जाए, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसके बाद, वह अपने जन्म की कहानी को याद करती हैं और यह सोचती हैं कि उनके जीवन के कई पल कैसे उनके अस्तित्व से जुड़े हैं। कहानी में, अमृता अपने पिता के साहित्यिक स्वभाव और उनकी कविताओं के प्रति अपने आकर्षण को भी दर्शाती हैं। वह अपने पिता के साथ अपने संबंधों को याद करती हैं और उन परछाइयों के बारे में बात करती हैं जो उनके जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। वह रसोई के नियमों और परंपराओं के खिलाफ विद्रोह करती हैं, जब वह देखती हैं कि उनके घर में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग बर्तन रखे जाते हैं। यह विद्रोह उनके स्वतंत्र विचारों और समाज में व्याप्त भेदभाव के खिलाफ उनकी आवाज को दर्शाता है। अमृता अपने जीवन के अनुभवों के माध्यम से यह समझने की कोशिश करती हैं कि कैसे उनका जीवन लिखने के कार्य से प्रभावित हुआ है। वह लिखने की प्रक्रिया को अपने अस्तित्व के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखती हैं, जिसमें उनकी चाहतें और अनिच्छा दोनों शामिल हैं। इस प्रकार, "रसीदी टिकट" एक गहन आत्मनिरीक्षण है, जो अमृता प्रीतम के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाता है, जिसमें उनके व्यक्तिगत संघर्ष, परिवार के प्रति प्रेम, और साहित्य के प्रति उनकी गहरी रुचि शामिल है।


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