आयुर्वेद दर्शन | Aayurveda Darshan

By: महादेव चंद्रशेखर पाठक - Mahadev Chandrashekhar Pathak


दो शब्द :

यह पाठ आयुर्वेद के दर्शन और सिद्धांतों पर केंद्रित है। लेखक ने आयुर्वेद को अन्य विज्ञानों से अलग एक विशेष स्थान दिया है और इसके तात्त्विक और ऐतिहासिक पहलुओं की चर्चा की है। उन्होंने बताया है कि आयुर्वेद में सृष्टि विज्ञान और अध्यात्म दोनों का समावेश है, लेकिन इसका प्राथमिक विषय सृष्टि विज्ञान है। पाठ में उल्लेख किया गया है कि आयुर्वेद का तंत्र विभिन्न परिषदों में चर्चा किए गए सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें आयुर्वेदिक तंत्रों के प्रवर्तक और विभिन्न सृष्टि विज्ञान के समर्थक ऋषि शामिल थे। यह भी कहा गया है कि आयुर्वेद का अध्ययन कभी भी साधारण लोगों के लिए नहीं था, जिससे समाज के अधिकांश लोग इससे अपरिचित रहे। लेखक ने यह भी बताया कि आयुर्वेद के सिद्धांत और तंत्र ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं और इनका अध्ययन करते समय हमें उनके पीछे के सृष्टि विज्ञान पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह संकेत किया कि आयुर्वेद का दर्शन विभिन्न सृष्टि विज्ञानों का समन्वय है और इसके तंत्र में विभिन्न तत्वों का गहन अध्ययन किया गया है। अंत में, लेखक ने आयुर्वेद की ऐतिहासिकता और उसके विकास की प्रक्रिया को रेखांकित किया है, यह बताते हुए कि कैसे विभिन्न कालों में आयुर्वेद के सिद्धांतों में परिवर्तन हुए और इनका संबंध अन्य दार्शनिक विचारों से कैसे जुड़ा है। उन्होंने पाठकों से आग्रह किया कि वे आयुर्वेद के सिद्धांतों को समझें और अपनाएं।


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